विश्व यक्ष्मा दिवस पर टीबी के नए मरीजों की खोज और उपचार पर दिया जाएगा जोर : जिलाधिकारी - निजी चिकित्सक को नए मरीज खोजने पर मिलेगें 500 रुपए - यूएसडीटी, एचआईवी और ब्ल्ड शुगर की जांच सरकारी अस्पताल में ही कराएं

 

विश्व यक्ष्मा दिवस पर टीबी के नए मरीजों की खोज और उपचार पर दिया जाएगा जोर : जिलाधिकारी

- निजी  चिकित्सक को नए मरीज खोजने पर मिलेगें 500 रुपए

- यूएसडीटी, एचआईवी और ब्ल्ड शुगर की जांच सरकारी अस्पताल में ही कराएं



सीतामढ़ी, 24 मार्च

विश्व यक्ष्मा दिवस पर समाहारणालय स्थित सभागार में बुधवार को यक्ष्मा पर फोरम मीटिंग का अयोजन हुआ। जिसकी अध्यक्षता जिलाधिकारी अभिलाषा कुमारी शर्मा ने की । जिलाधिकारी ने कहा टीबी से जिले और देश को वर्ष 2025 तक  मुक्त बनाने के लिए नए टीबी रोगियों की खोज और उनके तुरंत उपचार को प्राथमिकता देनी होगी। वहीं सिविल सर्जन डॉ राकेश चंद्र सहाय वर्मा ने कहा कि भारत सरकार का लक्ष्य है कि पूरे देश को वर्ष 2025 तक टीबी मुक्त बनाना है। जिसके लिए टीबी हारेगा, देश जीतेगा का नारा भी दिया गया है। अब निजी और सरकारी चिकित्सक मिलकर टीबी रोगियों की खोज कर उसे सरकारी अस्पताल में इलाज एवं जांच के लिए प्रेरित करेंगे । वहीं फोरम मीटिंग के दौरान जिला संचारी रोग पदाधिकारी डॉ मनोज कुमार ने पीपीटी के माध्यम से प्राइवेट प्रैक्टिशनर को जिले में  टीबी कार्यक्रम की पूर्ण जानकारी के साथ वस्तुस्थिति से भी अवगत कराया। डॉ मनोज ने कहा कि टीबी के 2017 से 2025 की रणनीति के अनुसार भारत को टीबी मुक्त देश और टीबी से मृत्यु को जीरो करना है, प्रति एक लाख पर अभी 217 मरीज की संख्या को 43 पर तथा मृत्युदर को 90 प्रतिशत कम करने का लक्ष्य रखा गया है।  प्राइवेट डॉक्टरों से अपील करते हुए डॉ मनोज ने कहा कि वैसे मरीज  जो उनके पास टीबी के इलाज के लिए आते हैं उन्हें यूएसडीटी, एचआईवी और ब्ल्ड शुगर की जांच कराने सरकारी अस्पताल में जरूर  भेजें। वहीं टीबी मरीजों की पहचान करने पर निजी  चिकित्सकों को भी पांच सौ रुपए दिए जायेंगे । 

रैली का हुआ आयोजन

विश्व यक्ष्मा दिवस पर सुबह  प्रशिक्षु नर्स एसटीएस तथा स्वास्थ्य कर्मचारियों ने रैली का अयोजन किया। रैली शहर के मुख्य जगहों से गुजरती हुई फिर से यक्ष्मा विभाग आकर रुकी। रास्ते में टीबी हारेगा देश जीतेगा के नारों से सारा सड़क गुंजायमान हो रहा था। रैली के बैनरों मे लिखे जागरूकता शब्द पर लोगों की खास निगाह गयी। 


2020 में 66 प्रतिशत मरीज हुए टीबी मुक्त 

जिला संचारी रोग पदाधिकारी डॉ मनोज कुमार ने पीपीटी के माध्यम से समझाते हुए कहा कि टीबी में जिले का प्रदर्शन अपेक्षाकृत अच्छा रहा पर हमें इसमें बहुत इजाफा करने की आवश्यकता है। 2020 में नए मरीजों की खोज के लिए कुल लक्ष्य 5330 का पीछा करते हुए कुल 2835 नए मरीजों की खोज की गयी है। जो लक्षित मरीजों का 53 प्रतिशत है। इस नए टीबी रोगियों में प्राइवेट डॉक्टरों का सहयोग 22.36 प्रतिशत और यक्ष्मा विभाग का 30.82 प्रतिशत है। 2020 में कुल 3247 टीबी मरीजों में 45 प्रतिशत मरीजों को यूएसडीटी की जांच आरटी-पीसीआर से की गयी। वहीं 2019 में कुल 66 प्रतिशत टीबी मरीज टीबी मुक्त हो गए। 

गरीबी और कुपोषण टीबी के कारक

डॉ मनोज कुमार ने कहा कि टीबी को हराने के लिए सबसे पहले हमारे समाज को आगे आने की जरूरत है। वहीं गरीबी और कुपोषण टीबी के सबसे बड़े कारक हैं। इसके बाद अत्यधिक भीड़, कच्चे मकान, घर के अंदर प्रदूषित हवा, प्रवासी, डायबिटीज, एचआईवी, धूम्रपान भी टीबी के कारण होते हैं। टीबी मुक्त करने के लिए सक्रिय रोगियों की खोज, प्राइवेट चिकित्सकों की सहभागिता, मल्टीसेक्टरल रेस्पांस, टीबी की दवाओं के साथ वैसे समुदाय के बीच भी पहुंच बनानी होगी जहां अभी तक लोगों का ध्यान नहीं जा पाया है। 

मीडिया का अहम रोल

टीबी के कारण और सरकार द्वारा दी जा रही सुविधाओं को जन-जन तक पहुंचाने में मीडिया अहम रोल अदा कर सकता है। इसलिए सभी मीडिया प्रतिनिधि  टीबी नियंत्रण कार्यक्रम को कवरेज दें ताकि भारत को टीबी मुक्त बनाया जा सके। 

निक्षय योजना का मिलता है लाभ 

डॉ मनोज ने कहा कि निक्षय योजना के तहत प्रत्येक टीबी मरीज को पूरे इलाज के दौरान 500 रुपये दिए जाते हैं ताकि वह अपने पोषण की जरुरतों को पूरा कर सके। यह राशि सीधे टीबी मरीजों के बैंक खाते में जाती  है । मौके पर जिलाधिकारी अभिलाषा कुमारी शर्मा, डीडीसी तरनजोत सिंह,  सिविल सर्जन डॉ सतीश चंद्र सहाय, जिला भीबीडी नियंत्रण पदाधिकारी डॉ आरके यादव, जिला यक्ष्मा विभाग के अकाउंटेंट रंजन शरण, एलटी शमीम आजाद, एसटीएस सुधा कुमारी, प्रिया कुमारी, हेमंत कुमार, पंकज कुमार आदि उपस्थित थे।


Comments