राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस: जिले के 31 लाख बच्चों को कृमिनाशक दवा खिलाने का लक्ष्य
राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस: जिले के 31 लाख बच्चों को कृमिनाशक दवा खिलाने का लक्ष्य
-22 अप्रैल एवं 26 अप्रैल को खिलाई जाएगी दवा
- 01 से 06 साल के बच्चों को आंगनबाड़ी एवं 06 से 19 साल के बच्चों को सरकारी व निजी स्कूलों में दवा सेवन कराने के लिए चलेगा विशेष अभियान
-जिले की आशा,आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, एएनएम को दवा सेवन हेतु आवश्यक है प्रशिक्षण
मोतिहारी, 20 अप्रैल । राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस के अवसर पर पूर्वी चम्पारण में 22 एवं 26 अप्रैल को 01 से 19 साल तक के 30,92,088 बच्चों को कृमि नाशक दवा सेवन कराने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। अभियान के क्रम में दवा सेवन से वंचित बच्चों के लिये 26 अप्रैल को मॉपअप राउंड का संचालन किया जायेगा। ताकि शत प्रतिशत बच्चों को दवा सेवन सुनिश्चित करायी जा सके। अभियान की सफलता को लेकर विभिन्न स्तरों पर जरूरी तैयारियों को अंतिम रूप दिया जा रहा है। जिलाधिकारी शीर्षत कपिल अशोक के निर्देश पर अभियान के सफल संचालन हेतु सभी प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारियों व अन्य अधिकारियों को पत्र जारी किया गया है।
कृमि के कारण अवरुद्ध होता है विकास:
पूर्वी चम्पारण के सिविल सर्जन डॉ अंजनी कुमार ने कहा कि कृमि के कारण बच्चों का शारीरिक व मानसिक विकास अवरुद्ध होता है। उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय कृमि दिवस के अवसर पर जिले के 01 से 19 साल तक के सभी बच्चों के लिये कृमि नाशक दवा का सेवन जरूरी है। इसके सेवन से बच्चे ,पेट के कई रोग, कुपोषण सहित अन्य बीमारियों से सुरक्षित होते हैं। निर्धारित समय पर कृमिनाशक दवा का सेवन जरूरी है। इससे शरीर के अंदर पल रहे कृमि नष्ट हो जाते हैं। बच्चों को दवा खिलाने के लिए जिले की चयनित आशा, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, एएनएम को प्रशिक्षण होना जरूरी है। साथ ही दवा सेवन कार्यक्रम में कोविड अनुरूप व्यवहारों का पालन किया जाना आवश्यक है।
कृमि की दवा खाने में न करें संकोच:
मोतिहारी सदर प्रखंड के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ श्रवण कुमार पासवान ने कहा कि कृमि की दवा खाने में किसी प्रकार के संकोच न करें। इससे स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ता बल्कि यह शरीर को सुरक्षित रखने के लिए जरूरी है। कृमि की दवा आशा, एएनएम, आंगनबाड़ी केंद्रों, स्कूलों के माध्यम से खिलायी जानी है। स्वास्थ्य कर्मियों की टीम सहयोग में रहेगी। उन्होंने बताया कि 01 से 02 साल तक के बच्चों को अल्बेंडाजोल 400 मिलिग्राम ग्राम की आधी गोली दो चम्मचों के बीच अच्छी तरह पीस कर खिलायी जानी है। वहीं 02 से 03 साल तक के बच्चों को पूरी गोली को पीस कर पानी में घोल कर पिलायी जानी है। वहीं 3 से 19 वर्ष तक के बच्चों को पूरी गोली चबाकर खानी है। दवा की खुराक बच्चों को खाली पेट में नहीं दी जानी है। बीमार बच्चों का दवा का सेवन नहीं कराया जाना है।
सीएस डॉ अंजनी कुमार ने बताया कि अभियान की सफलता को लेकर आईसीडीएस, शिक्षा व स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी व कर्मियों को जिलाधिकारी के माध्यम से जरूरी दिशा निर्देश दिया गया है। अभियान में निजी स्कूल भी बढ़-चढ़ कर अपनी भागीदारी निभायेंगे। स्कूल संचालकों के साथ समन्वय स्थापित करने का निर्देश जारी किया गया है।
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