यक्ष्मा उन्मूलन को लेकर पब्लिक और प्राइवेट चिकित्सकों की दिख रही गंभीरता

यक्ष्मा उन्मूलन को लेकर पब्लिक और प्राइवेट चिकित्सकों की दिख रही गंभीरता 

 - पिछले चार महीने में प्राइवेट चिकित्सकों ने खोजे 760 टीबी मरीज 

मुजफ्फरपुर,28अप्रैल।

पूरे देश में 2025 तक टीबी  उन्मूलन के प्रयास चल रहे हैं। जिसमें जिले के पब्लिक और प्राइवेट चिकित्सक गंभीरता से टीबी मरीजों की खोज और उपचार पर ध्यान दे रहे हैं। जिससे टीबी नोटिफिकेशन की संख्या में भी इजाफा हुआ है। जिला यक्ष्मा पदाधिकारी डॉ उपेन्द्र चौधरी ने बताया कि जिले में पिछले चार महीने में पब्लिक नोटिफिकेशन की संख्या लगभग एक हजार के करीब है। वहीं प्राइवेट चिकित्सकों के द्वारा 760 टीबी मरीजों की खोज की गयी है। जिले में टीबी एमडीआर के 34 मरीजों की खोज हुई है। टीबी के खात्मे को लेकर समय- समय पर विभिन्न तरह की गतिविधियां की जाती रही है। 

जांच के लिए अत्याधुनिक मशीनें:

डॉ चौधरी ने कहा कि जिले में 22 डीएमसी फंक्शनल हैं। इसके अलावा 4 ट्रूनेट मशीन जो डीटीसी, एसकेएमसीएच, बांद्रा तथा पारु में है। वहीं एक ड्यूल ट्रूनेट मशीन भी डीटीसी में है। इसके अलावा दो सीबी नेट मशीन भी है।

प्राइवेट नोटिफिकेशन पर 500 रुपए:

प्राइवेट चिकित्सकों को प्रत्येक टीबी नोटिफिकेशन पर 500 रुपए दिए जा रहे हैं। वहीं टीबी नोटिफाई होने पर मरीजों को छह माह तक मुफ्त में दवा दी जा रही है। इसके अलावा एमडीआर के मरीजों को बेडाक्वीलीन,आइसोनियाजाइड,पाराजिनामाइड जैसी महंगी दवाएं दी जा रही हैं। इससे पूर्व मरीजों को ईसीजी, शुगर, एचआईवी और  एक्सरे जांच जैसी सुविधाएं बिल्कुल मुफ्त दी जा रही हैं।

सहयोगी संस्थाओं का मिल रहा सहयोग: 

डॉ उपेन्द्र चौधरी ने कहा कि टीबी के मरीजों की खोज तथा उपचार में सहयोगी संस्थाओं का भी काफी सहयोग मिल रहा है। जिसमें रीच तथा डीएफवाई मुख्य रूप से शामिल हैं। 

निक्षय पोषण योजना के तहत दी जा रही राशि :

डॉ चौधरी ने बताया कि टीबी मरीजों को निक्षय पोषण योजना के तहत कुपोषण को दूर करने के लिए पांच सौ की राशि दी जाती है। यह राशि दवा की शुरुआत से छह महीने तक दी जाती है। 

टीबी के लक्षण :

- दो हफ्ते से ज्याादा की खांसी 

- वजन का लगातार कम होना

- भूख न लगना

- सीने में दर्द 

- बलगम में खून का आना

- शाम को बुखार चढ़ना

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