जिला में एईएस/जेई के नहीं आए एक भी मामले
जिला में एईएस/जेई के नहीं आए एक भी मामले
- स्वास्थ्य विभाग के प्रयासों और निरंतर निगरानी की बदौलत जिले में एईएस-जेई को रोकने में सफलता मिली
शिवहर, 27 मई।
स्वास्थ्य विभाग के प्रयासों और निरंतर निगरानी की बदौलत इस वर्ष जिले में एईएस-जेई के मामले को नियंत्रण में रखा गया है। इस बार जिले में अभी तक एक भी मामले एईएस-जेई के सामने नहीं आए हैं। जिले में 16 संदेहास्पद केस आए हैं, उन्हें त्वरित इलाज देकर स्वस्थ्य कर घर भेज दिया गया। लेकिन एईएस-जेई की पुष्टि किसी में नहीं हुई। जिला भीबीडी नियंत्रण पदाधिकारी डॉ. सुरेश राम ने कहा कि एईएस-जेई की रोकथाम के लिए पुख्ता इंतजाम किए हैं। विभाग की पर्याप्त व्यवस्थाओं का ही नतीजा है कि इस बार एईएस के कहर को जिले में शांत रखने में सफलता मिली है। उन्होंने कहा कि जिला से प्रखंड स्तर तक के सरकारी अस्पतालों में पूरी व्यवस्था की गई है।
फैलायी जा रही जागरूकता, स्वास्थ्य कर्मियों को मिला प्रशिक्षण:
डॉ. सुरेश राम ने कहा कि हैंडबिल/पोस्टर वितरण दिवाल लेखन, होर्डिंग/फ्लैक्स इत्यादि के माध्यम से जागरूकता फैलायी जा रही है। सभी पंचायत सरकार भवन, स्कूल, आंगनबाड़ी केंद्रों पर दिवाल लेखन का कार्य किया गया है। इसके अलावा पंचायत स्तर पर संध्या चौपाल का आयोजन कर चमकी को धमकी देते हुए जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। शिशु रोग विशेषज्ञ, एएनएम, आशा, आंगनबाड़ी आदि को प्रशिक्षित किया गया है।
दवाइयां एवं उपकरण उपलब्ध की गई:
डॉ. सुरेश राम ने कहा कि जिले के सभी अस्पतालों में एईएस/चमकी बुखार से संबंधित सभी आवश्यक दवाइयां एवं उपकरणों की उपलब्धता सुनिश्चित की गई है। रेफरल सिस्टम पूरी मजबूती के साथ कार्य कर रहा है। आंगनबाड़ी सेविका/सहायिका जीविका दीदियों एवं आशा कार्यकर्ताओं के द्वारा दैनिक रूप से डोर टू डोर विजिट करते हुए अभिभावकों को जागरूक किया जा रहा है। प्रत्येक वार्ड में 10 वर्ष से कम आयु के बच्चों पर विशेष नजर रखी जा रही है। आशा कार्यकर्ता व आंगनबाड़ी सेविकाओं को स्वास्थ्य विभाग की ओर से एईएस किट दी गयी है। जिसमें पैरासिटामोटल टैबलेट, ओआरएस का पैकेट व प्रचार सामग्री है, ताकि किसी बच्चे की सेहत खराब होने और उनमें चमकी बुखार के लक्षण दिखे तो बताये गये डोज के हिसाब से दवा दे सकें। इसके बाद तुरंत उसे नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराना भी सुनिश्चित करा सकें।
बेहोशी या चमकी दिखने पर तुरंत अस्पताल जाएं:
जिला भीबीडी नियंत्रण पदाधिकारी डॉ. सुरेश कुमार राम ने कहा कि गंभीर बीमारी चमकी से पीड़ित बच्चों को समय पर इलाज किया जाये तो वह पूरी तरह से ठीक हो जाते हैं। इसमें तीन बातों को याद रखने की जरूरत है। इसमें पहली यह है कि बच्चों को रात में सोने से पहले खाना जरूर खिलायें। इसके बाद सुबह उठते ही बच्चों को भी जगाएं। देखें कि बच्चा कहीं बेहोश या उसे चमकी तो नहीं हुई है। बेहोशी या चमकी दिखते ही तुरंत एंबुलेंस या किसी दूसरे वाहन से अस्पताल ले जायें। चमकी बुखार से पीड़त बच्चों को अस्पताल पहुंचाने के लिए गाड़ी का भाड़ा स्वास्थ्य विभाग देती है।
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