जिले भर में लगेंगे 133 मेगा ईएमटीसीटी कैंप

जिले भर में लगेंगे 133 मेगा ईएमटीसीटी कैंप 

- हेल्थ कैंप में गर्भवती महिलाएं, उनके पति, एचआईवी संक्रमित माता-पिता के बच्चों के साथ ही यक्ष्मा एवं कालाजार के मरीजों की होगी जांच 

सीतामढ़ी, 22 जून। 

एचआईवी की रोकथाम के लिए जिले में स्वास्थ्य विभाग की पहल लगातार जारी है। इसके लिए समय-समय पर अभियान चलाए जा रहे हैं। इसी कड़ी में बिहार राज्य एड्स नियंत्रण समिति के निर्देश पर जिले भर में 133 मेगा ईएमटीसीटी (एलिमिनेशन ऑफ मदर टू चाइल्ड ट्रांसमिशन) कैंप का आयोजन किया जाएगा। मेगा कैंप के आयोजन का मुख्य उद्देश्य उन गर्भवती महिलाओं तक पहुंचना है, जो एचआईवी परामर्श अथवा जांच से वंचित रह गईं हैं। संचारी रोग पदाधिकारी डॉ. मनोज  कुमार ने कहा कि हेल्थ कैंप में मुख्य रूप से गर्भवती महिलाएं, उनके पति, एचआईवी संक्रमित माता-पिता के बच्चों के साथ ही यक्ष्मा एवं कालाजार के मरीजों के जांच की व्यवस्था रहेगी। प्रत्येक प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र अंतर्गत सात मेगा कैंप लगाना है। 

सफल आयोजन को लेकर होगी बैठक-

संचारी रोग पदाधिकारी डॉ. मनोज  कुमार ने कहा कि हेल्थ कैम्प के सफल आयोजन को लेकर शुक्रवार को जिला स्वास्थ्य समिति के सभागार में जिला एड्स नियंत्रण समिति की ओर से बैठक होगी। जिससे हेल्थ कैंप को ज्यादा प्रभावी बनाया जा सके। साथ ही हेल्थ कैम्प को लेकर विभिन्न माध्यमों से व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाएगा। जिससे हेल्थ कैंप के लक्ष्य को पूरा किया जा सके। हेल्थ कैम्प का आयोजन जिलास्तर, अनुमण्डल स्तर और प्रखण्ड स्तर पर कार्यरत आईसीटीसी/एसटीडी/आरएनटीसीपी के कर्मियों के साथ-साथ एएनएम, आशा कार्यकर्ता और आंगनबाड़ी कार्यकर्ता के सहयोग से किया जाएगा। कैंप की प्रत्येक स्तर पर मॉनिटरिंग की जाएगी।

एचआईवी मुक्त जिला के लिए विभाग संकल्पित-

डॉ. मनोज  कुमार ने कहा कि एलिमिनेशन फोर मदर टू चाइल्ड ट्रांसमिशन के कारण बच्चों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। इसलिए हर महिला की एचआईवी जांच अतिआवश्यक है। ताकि ससमय उसका इलाज हो सके। इससे शिशु मृत्युदर को भी कम करने में मदद मिलेगी। इसी उद्देश्य के तहत जिले भर में 133 ईएमटीसीटी हेल्थ कैम्प लगाया जाएगा। उन्होंने कहा कि जिला को एचआईवी मुक्त रखने के लिए स्वास्थ्य विभाग संकल्पित है। इसके लिए जिला में एचआईवी संक्रमितों की आईसीटीसी केंद्रों पर पहचान कर एआरटी सेंटर पर रेफर किया जाता है, जहां उन्हें मुफ्त दवा दी  जाती  है।

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