सुरक्षित गर्भपात पर पटेढ़ी बेलसर में आंगनबाड़ी दीदी हुई प्रशिक्षित

सुरक्षित गर्भपात पर पटेढ़ी बेलसर में आंगनबाड़ी दीदी हुई प्रशिक्षित 

- 30 आंगनबाड़ी दीदी हुई प्रशिक्षित 

- सीडीपीओ कार्यालय में दी गयी जानकारी

वैशाली, 28 जून । 

साझा प्रयास नेटवर्क एवं औलिया आध्यात्मिक अनुसंधान केन्द्र वैशाली द्वारा पटेढ़ी बेलसर में सुरक्षित गर्भसमापन पर आंगनबाड़ी दीदी को प्रशिक्षित किया गया। प्रशिक्षण के दौरान विशेष श्रेणी की  महिलाओं के गर्भ समापन की अवधि 20 से 24 सप्ताह तक बढ़ाये गए  कानून  के बारे में औलिया आध्यात्मिक अनुसंधान केंद्र के रिसर्च एवं ट्रेंनिग पदाधिकारी राम कृष्ण ने विशेष बैठक के दौरान जानकारी प्रदान की। इस बैठक में जानकारी दी कि 1971 से पूर्व किसी भी प्रकार का गर्भ समापन अवैध माना जाता था। गर्भ समापन के लिए बड़ी कठिनाइयां होती थी। अनेक तरह के घरेलू उपायों से गर्भ समापन करने को प्रक्रिया में महिलाओं की मृत्यु हो जाती थी। उसे रोकने के लिए 1971 में मे एमटीपी एक्ट बना। इसके बाद से सुरक्षित गर्भ समापन की प्रक्रिया शुरू हुई। अज्ञानता के कारण तथा सरकारी अस्पतालों में सुविधा नहीं होने के कारण  गर्भवती महिलाओं को मृत्यु दर में कुछ खास कमी नहीं हो रही थी। उन्होंने बताया कि 1971 के प्रावधानों के अनुसार गर्भ समापन की शर्तों के साथ वैध माना गया एवं एमटीपी एक्ट में 2021  में संशोधन किया गया। जिससे विशेष श्रेणी की  महिलाओं के लिए 24 सप्ताह तक के गर्भ को शर्तों के अनुसार समापन कराया जा सकता है।

उन्होंने बताया कि पर्याप्त विकृति के मामलों में गर्भावस्था के दौरान किसी भी समय गर्भ समापन को मान्य किया गया है। किसी भी महिला या उसके साथी के द्वारा प्रयोग किए गए गर्भनिरोधक तरीके की विफलता की  स्थिति में अविवाहित महिलाओं को भी  गर्भ समापन सेवाएं दी जा सकेंगी। उन्होंने बताया कि 20 सप्ताह तक एमटीपी के लिए एक आरएमपी और 20 से 24 सप्ताह के लिए दो आर एम पी की राय चाहिए। इतना ही नहीं उन्होंने कहा कि गोपनीयता को कड़ाई से बनाए रखा जाना आवश्यक है। इस मौके पर महिला पर्यवेक्षिका श्रीमती अंजू कुमारी एवं आई पास डेवलपमेंट फाउंडेशन पटना से कार्यक्रम पदाधिकारी श्री राजीव कुमार गुप्ता मौजूद  थे।

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