मातृ पोषण की महत्ता पर कार्यशाला आयोजित
मातृ पोषण की महत्ता पर कार्यशाला आयोजित
-अलाइव एंड थ्राइव के सहयोग से कार्यशाला आयोजित
सीतामढ़ी, 16 जून। महिलाओं को कुपोषण के दंश से बचाने के लिए गुरुवार को अलाइव एंड थ्राइव के सहयोग से प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन किया गया। शहर के एक होटल में आयोजित कार्यशाला के माध्यम से मातृ पोषण की महत्ता पर विस्तार से प्रकाश डाला गया। इससे पहले कार्यशाला का उद्घाटन अलाइव एंड थ्राइव की राज्य प्रमुख डॉ अनुपमा श्रीवास्तव ने किया। कार्यशाला में जिले के विभिन्न स्वास्थ्य केंद्रों के एमओआईसी, बीएचएम, सीडीपीओ, एलएस इत्यादि मौजूद थे।
डॉ अनुपमा श्रीवास्तव ने कहा कि इस प्रशिक्षण के माध्यम से परिचारिकाओं की दक्षता में गुणात्मक वृद्धि होगी। जिससे मातृ एवं नवजात शिशु के स्वास्थ्य के सभी लक्ष्यों को आसानी से प्राप्त कर सकते हैं।
पोषक तत्वों से भरपुर आहार खाएं -
कार्यशाला को संबोधित करते हुए डॉ अनुपम श्रीवास्तव ने कहा कि संतुलित आहार के सेवन से गर्भावस्था से लेकर प्रसव के बाद मां एवं नवजात शिशु को होने वाली कई परेशानियों एवं बीमारियों से बचा जा सकता है। उन्होंने बताया कि एक गर्भवती महिला के लिए यह जरूरी है कि वह पोषक तत्वों से भरपुर आहार खाए। इससे उसे अपने और गर्भस्थ शिशु के लिए जरूरी सभी आवश्यक पोषक तत्व मिल सकेंगे। उसके आहार में विविधता होनी चाहिए, जिससे माँ और बच्चे दोनों का शारीरिक और बौद्धिक विकास सही तरीके से हो सके। उसके आहार में अधिक विटामिन और खनिज, विशेष रूप से फॉलिक एसिड और आयरन की जरूरत है।
भोजन में आयरन और फॉलिक एसिड की सही मात्रा जरूरी-
डॉ. अनुपमा श्रीवास्तव ने बताया कि गर्भावस्था में प्रतिदिन के भोजन में आयरन और फॉलिक एसिड की सही मात्रा लेना भी जरूरी है। एक गर्भवती महिला को आहार सेवन में विभिन्नता लानी चहिए। गर्भावस्था और जन्म के बाद के पहले 1000 दिन नवजात के शुरुआती जीवन की सबसे महत्वपूर्ण अवस्था होती है। आरंभिक अवस्था में उचित पोषण नहीं मिलने से बच्चों के मस्तिष्क विकास में भारी नुकसान हो सकता है। जिसकी भरपाई नहीं हो पाती है। शिशु जन्म के बाद पहले वर्ष का पोषण बच्चों के मस्तिष्क और शरीर के स्वस्थ विकास और प्रतिरोधकता बढ़ाने में बुनियादी भूमिका निभाता है। शुरुआती के 1000 दिनों में बेहतर पोषण सुनश्चित होने से मोटापा और जटिल रोगों से भी बचा जा सकता है। नवजात शिशु और बच्चे की इम्युनिटी बढ़ाने के लिए उसे जन्म के एक घंटे के अंदर मां का दूध पिलाना जरूरी है। दो साल की उम्र तक बच्चों को स्तनपान कराएं। यह नवजात शिशु को कई संक्रमण और बीमारियों से सुरक्षित रखता है। स्तनपान कराने से नवजात शिशु के लिए जरूरी सभी पोषक तत्व मिल जाते हैं। इससे उनका संपूर्ण पोषण होता है। जिससे बढ़ते बच्चों में मेटाबॉलिज्म की जरूरतें पूरी होती हैं।
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