20 सितंबर को मनाया जाएगा राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस

- 19 साल तक के बच्चों को खिलायी जाएगी एल्बेंडाजोल की दवा

सीतामढ़ी। जिले में राष्ट्रीय कृमि मुक्ति अभियान सितंबर माह में चलाया जायेगा। इसके साथ ही 20 सितंबर को “राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस” मनाया जायेगा। इस अभियान के तहत जिले में 1 से 19 वर्ष तक के सभी बच्चे एवं किशोर-किशोरियों को कृमि नाशक अल्बेंडाजोल की गोली खिलायी जायेगी। यदि कोई बच्चा किन्हीं कारणों से छूट जाता है तो 23 सितंबर को मॉप अप राउंड में भी गोली खिलाई जाएगी। इसके साथ ही अभिभावकों को स्वच्छता के प्रति जागरुक किया जाएगा। जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी डॉ. एके झा ने बताया कि विद्यालयों में बच्चे शिक्षक की उपस्थिति में गोली खाएंगे। इसके अलावा आंगनवाड़ी केंद्रों पर आंगनबाड़ी कार्यकर्ता की उपस्थिति मे सभी एक से पांच वर्ष के बच्चों को एल्बेंडाजोल की गोली खिलाई जाएगी।

चल रही व्यापक तैयारी, कराया जाएगा प्रचार प्रसार- 

डीआइओ डॉ. एके झा ने बताया कि “राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस” पर बच्चों को उम्र के अनुसार खुराक दी जाएगी। इसे लेकर व्यापक तैयारी की जा रही है। उन्होंने उम्मीद जताया कि इसे लेकर जो लक्ष्य निर्धारित किया जाएगा, उसे पूरा कर लिया जाएगा। डीआईओ ने कहा कि इस संबंध में सभी विद्यालयों एवं ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में पोस्टर, बैनर, पंपलेट और माइकिंग आदि के माध्यम से अधिक से अधिक प्रचार प्रसार कराया जाएगा। जिससे कोई भी बच्चा यह दवाई खाने से छूट ना पाए। कोई अभिभावक अपने बच्चे को गोली खिलाने से मना करता है तो उसे समझाया जाएगा कि यह गोली उनके बच्चे के स्वास्थ्य के लिए बहुत लाभदायक है।

पेट में कीड़े होने से बच्चों को होती है परेशानियां-

बच्चों में कृमि संक्रमण की वजह से खून की कमी देखी जाती है। इसके कारण कुपोषण, भूख न लगना, कमजोरी, बेचैनी, पेट दर्द, उल्टी, दस्त एवं वजन कम होने लगती है। ऐसे में ऐल्बेंडाजोल (400 ग्राम) की गोली दिया जाना आवश्यक है। एल्बेंडाजोल की खुराक खिलाने के बाद तीव्र संक्रमण वाले मरीजों के पेट में दर्द अथवा उल्टी की शिकायत हो सकती है। इससे घबराने की जरूरत नहीं है। कुछ देर में पेट दर्द व उल्टी की शिकायत बंद हो जाती है।

बच्चों को एल्बेंडाजोल खिलाने से होने वाले लाभ-

- एनीमिया में कमी एवं पोषण स्तर में वृद्धि

- बच्चों में शारीरिक वृद्धि एवं वजन बढ़ना

- मानसिक एवं शारीरिक विकास में बढ़ोतरी

- बीमारियों से बचने हेतु प्रतिरोधी क्षमता बढ़ना

- बच्चों की याददाश्त में वृद्धि एवं स्कूल में सक्रिय रहना

Comments