जीवन मे न हो निराश निःसन्तानता का है इलाज- डॉ रूबी कुमारी , नीलकण्ठ आइवीएफ

जीवन मे न हो निराश निःसन्तानता का है इलाज- डॉ रूबी कुमारी , नीलकण्ठ आइवीएफ

ब्यूरो/ पूर्वी चम्पारण




निसंतान दंपत्ति संतान की चाहत में हर तरह के उपाय और तरीके आज़मा लेते हैं लेकिन इससे उन्हें कुछ फायदा नहीं होता। ऐसे मे कुछ आसान तरीके भी हैं जिनसे निसंतान दंपत्तियों को संतान सुख की प्राप्ति हो सकती है- उपरोक्त बातें नीलकण्ठ आईवीएफ के बिहार हेड- मुकेश शुक्ला ने कही, उन्होंने बताया कि इस तकनीक के ज़रिये निसंतान दंपत्ति अपने जीवन में संतान सुख पा सकते हैं।उन्होंने बताया कि 26 अगस्त को मोतिहारी में टाउन थाना के सामने हरिराम क्लीनिक में नीलकण्ठ आइवीएफ द्वारा कैम्प का आयोजन किया जा रहा है जिसमें निः सन्तान दंपत्तियों को विशेषज्ञ चिकित्सकों के तरफ से निःशुल्क परामर्श दिया जाएगा।


 नीलकण्ठ आइवीएफ क्लिनिक की डॉ सोनाली गुप्ता व हरिराम क्लीनिक की डॉ रूबी कुमारी ने बताया कि आईवीएफ तकनीक के ज़रिये ट्यूब ब्लॉकेज और अंडों की कमी की वजह से मां न बन पाने वाली महिलाएं भी संतान सुख पा सकती हैं।


- जीवनशैली और खान-पान में बदलाव है ज़रूरी;


पॉलीसिस्टिक ओवेरियन डिसीज़ यानी पीसीओडी आजकल महिलाओं में तेज़ी से बढ़ रही है। इसका सबसे बड़ा कारण होता है हॉर्मोन असंतुलन और ये महावारी के चक्र के असंतुलन के रुप में सामने आता है। इसके लक्षणों में मोटापा बढ़ना, चेहरे पर बाल आना, मुहांसे आना और तैलीय त्वचा होना है। पीसीओडी में निसंतानता होने पर आईयूआई का विकल्प मौजूद है लेकिन अगर आईयूआई से भी गर्भधारण नहीं हो पाता तो ऐसे में आईवीएफ ही सबसे कारगर उपाय है।


- इनफर्टिलिटी से जूझने वाले दंपत्ति ले रहे हैं आईवीएफ तकनीक का सहारा;


देश में इनफर्टिलिटी के आंकड़े और नि:संतान दंपत्तियों की तादाद लगातार बढ़ती जा रही है। ऐसे में विज्ञान ने इनफर्टिलिटी से जूझ रहे लोगों को ‘’आईवीएफ’’ का बहुत ही बेहतरीन तोहफा मिला है।

सामान्य बच्चों जैसे ही होते हैं आईवीएफ से जन्मे बच्चे

सामान्य बच्चों जैसे ही होते है।

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