एनआरसी में 183 बच्चे हुए सुपोषित, हँसते-खिलखिलाते गए घर
- कुपोषण की जद से मुक्ति दिलाकर बच्चों को सुपोषित बनाने में जुटा है सदर अस्पताल में संचालित पोषण पुनर्वास केंद्र
शिवहर। कुपोषण की जद से मुक्ति दिलाकर बच्चों को सुपोषित बनाने में जुटा है सरोजा सीताराम सदर अस्पताल स्थित पोषण पुनर्वास केंद्र (एनआरसी)। दो वर्ष में यह केंद्र 183 कुपोषित बच्चों को सुपोषित बनाकर उन्हें नया जीवन दे चुका है। पुनर्वास केंद्र बच्चों को न केवल नवजीवन प्रदान कर रहा है, बल्कि कुपोषण के खिलाफ जारी जंग में बड़ा हथियार साबित हो रहा है। सदर अस्पताल में संचालित पोषण पुनर्वास केंद्र में बच्चों को पौष्टिक भोजन के जरिए कुपोषण से बचाया जा रहा है। वहीं अक्षर ज्ञान के जरिए मानसिक विकास भी कराया जा रहा है। यहां कुपोषित बच्चों को उनकी मां के साथ 21 दिनों तक रखा जाता है। सितंबर 2020 को सदर अस्पताल में 20 बेड के पोषण पुनर्वास केंद्र की स्थापना हुई थी। इसके बाद से यह केंद्र बच्चों को सुपोषित करने में जुटा है।
सुपोषित होकर बच्चे हँसते खिलखिलाते जाते हैं घर-
पोषण पुनर्वास केंद्र की इंचार्ज सुनीता तिवारी ने बताया कि पोषण पुनर्वास केंद्र में कुपोषित बच्चों का निशुल्क उपचार किया जाता है। कुपोषित बच्चों को 14 से 21 दिनों तक इस केंद्र में रखकर सुपोषित बनाने का प्रयास किया जाता है। सितंबर 2020 से मार्च 2021 तक यहां 44 बच्चों ने स्वास्थ्य लाभ किया। अप्रैल 2021 से मार्च 2022 तक 83 बच्चे, जबकि अप्रैल 2022 से अगस्त 2022 तक 56 बच्चे कुपोषण को मात देकर हँसते खिलखिलाते अपने-अपने घर वापस गए हैं। भर्ती हुए बच्चों को दवाओं के साथ-साथ उचित मात्रा में प्रोटीन, वसा, कार्बोहाइड्रेट, विटामिन व खनिज तत्वों से भरपूर आहार प्रदान किया जाता है। आहार पर केंद्र की आहार परामर्शदाता (डायटीशियन) चित्रा मिश्रा नजर रखती हैं।
बच्चों के लिए डाइट प्लान तैयार-
केंद्र की डायटीशियन चित्रा मिश्रा ने बताया कि बच्चों के लिए डाइट प्लान तैयार किया गया है। इसी के अनुसार बच्चों को आहार दिया जाता है। बच्चों को आहार में खिचड़ी, दलिया, सेव, चुकंदर, अंडा समेत अन्य पौष्टिक आहार नि:शुल्क उपलब्ध कराया जाता है। उन्होंने बताया कि पोषण पुनर्वास केंद्र में 0 से लेकर 5 वर्ष तक के कुपोषित बच्चों को भर्ती किया जाता है। कुपोषित बच्चों की पहचान के लिए तीन स्तर पर उनकी जांच की जाती है। सर्वप्रथम बच्चे का हाइट के अनुसार वजन देखा जाता है। दूसरे स्तर पर एमयूएसी जांच में बच्चे के बाजू का माप 11.5 से कम होना तथा बच्चे का इडिमा से ग्रसित होना शामिल है। तीनों स्तर पर जांच के बाद बच्चे को कुपोषित की श्रेणी में रखकर उसे भर्ती किया जाता है और उपचार के साथ पौष्टिक आहार दिया जाता है।
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