नाइट ब्लड सर्वे के दौरान फाइलेरिया रोगियों की होगी पहचान

- अभियान को सफल बनाने के लिए लैब टेक्निशियन को दिया गया प्रशिक्षण

सीतामढ़ी। जिले में फाइलेरिया उन्मूलन को लेकर जल्द ही नाइट ब्लड सर्वे अभियान चलाया जाएगा। अभियान को सफल बनाने के लिए जीएनएम ट्रेनिंग सेंटर में एक दिवसीय प्रशिक्षण शिविर का आयोजन हुआ। जिसकी अध्यक्षता सिविल सर्जन डॉ. सुरेश चंद्र लाल ने की। इस दौरान मास्टर ट्रेनर मधुकर और राजकुमार ने सभी प्रखंडों से आए लैब टेक्निशियन को प्रशिक्षण में अभियान के बारे में जानकारी दी। इस बीच नाइट ब्लड सर्वे के दौरान किन-किन बातों का ध्यान रखना है जैसी तमाम जानकारियां दी गई। जिला भीबीडी नियंत्रण पदाधिकारी डॉ रवीन्द्र कुमार यादव ने बताया कि जिले में नाइट ब्लड सर्वे की तैयारी शुरू कर दी गयी है। प्रत्येक प्रखंड में एक रैंडम और एक सेंटीनल साइट पर नाइट ब्लड सर्वे किया जाएगा। वहां नाइट ब्लड सर्वे टीम के सदस्य 20 वर्ष से अधिक आयु वर्ग के लोगों का सैंपल एकत्र करेंगे। एक साइट पर 300 और दूसरे साइट पर भी 300 यानि कुल 600 लोगों के ब्लड सैंपल लिए जाएंगे। जिसे जांच के लिए लैब भेजा जाएगा। चूंकि खून में फाइलेरिया के परजीवी रात में ही सक्रिय होते हैं। इसलिए नाइट ब्लड सर्वे से सही रिपोर्ट पता चल पाता है। नाइट ब्लड सर्वे के लिए चार सदस्यीय टीम बनाई जाएगी। 

सामान्य और स्वस्थ दिखने वाले व्यक्ति भी जांच कराएं-

डब्ल्यूएचओ के राज्य समन्वयक डॉ राजेश पांडेय ने फाइलेरिया के होने और उसके स्टेज के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि फाइलेरिया में सबसे अहम बात है कि इसके प्रसार को रोकना है। अगर नाइट ब्लड सर्वे में एक प्रतिशत से कम लोग पॉजिटिव मिलते हैं, तो यह अच्छी बात होगी।

उन्होंने कहा कि फाइलेरिया या हाथी पांव के लक्षण सामान्यता शुरू में दिखाई नहीं देते हैं। इसके परजीवी शरीर में प्रवेश करने के बाद इसके लक्षण लगभग पांच से दस सालों बाद दिखाई दे सकते हैं। इसलिए सामान्य और स्वस्थ दिखने वाले व्यक्ति भी इसकी जांच कराएं। फाइलेरिया एक घातक बीमारी है। ये साइलेंस रहकर शरीर को खराब करती है। फाइलेरिया एक परजीवी रोग है, जो एक कृमि जनित मच्छर से फैलने वाला रोग है। यह मादा क्यूलेक्स मच्छर के काटने से फैलता है। आमतौर पर फाइलेरिया के लक्षण स्पष्ट रूप से दिखाई नहीं देते, लेकिन बुखार, बदन में खुजली व सूजन की समस्या दिखाई देती है। इसके अलावा पैरों और हाथों में सूजन, हाथी पांव और हाइड्रोसिल अंडकोषों की सूजन, फाइलेरिया के लक्षण हैं। फाइलेरिया हो जाने के बाद धीरे-धीरे यह गंभीर रूप लेने लगता है। इसका कोई ठोस इलाज नहीं है। लेकिन इसकी नियमित और उचित देखभाल कर जटिलताओं से बचा जा सकता है। 

प्रखंडों में फाइलेरिया की स्थिति पता चलेगा-

सिविल सर्जन डॉ सुरेश चंद्र लाल ने बताया कि नाइट ब्लड सर्वे की गतिविधियों का आयोजन करने का मुख्य उद्देश्य प्रखंड स्तर पर फाइलेरिया व माइक्रो फाइलेरिया की दर को जानना है। नाइट ब्लड सर्वे से यह पता चलेगा कि कितने लोगों में फाइलेरिया का पैरासाइट मौजूद है। फाइलेरिया का पारासाइट रात में ही सक्रिय होता है। इसलिए नाइट ब्लड सर्वे में रात 8 बजे से 12 बजे रात के बीच ही ब्लड सैंपल लिया जाएगा। उन्होंने कहा कि नाईट ब्लड सर्वे अभियान के तहत रक्त संग्रह केंद्रों पर ग्रामीणों को बुलाने के लिए आशा कार्यकर्ता और आंगनबाड़ी सेविकाओं सहित अन्य कर्मियों का सहयोग लिया जाएगा। अभियान की सफलता के लिए गांव स्तर पर विभिन्न माध्यमों से जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। मौके पर डीपीएम असीत रंजन व केयर डीटीएल मानस कुमार आदि उपस्थित रहे।

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