बिमलेश टीबी से घबराकर टूटे नहीं, आज दूसरे को दे रहे ताकत
- बिमलेश ने टीबी जैसी गंभीर बीमारी को मात देने में सफलता हासिल की, आज टीबी चैम्पियन बन टीबी के प्रति फैली भ्रांतियों को दूर कर रहे
सीतामढ़ी। अगर सोच सकारात्मक हो तो आप बड़ी से बड़ी बाधा को पार करने में सफल हो सकते हैं। ऐसा ही कुछ कर दिखाया है जिले के डुमरा स्थित विश्वनाथपुर गांव के बिमलेश ने, बिमलेश ने टीबी जैसी गंभीर बीमारी को मात देने में सफलता हासिल की है। उन्हें एमडीआर टीबी थी और वे निराश थे। बीमारी होने ज्यादा वे इस बात से निराश थे कि लोग समाज में टीबी से ग्रसित लोगों के साथ छुआछूत जैसा व्यवहार करते हैं। इसके साथ ही किसी की शादी टूट जाती है व लोग उससे बातचीत करना तक बंद कर देते हैं। लेकिन बिमलेश इन बातों से घबराकर खुद को टूटने नहीं दिया। वे मजबूती से इसका सामना करते रहे और 26 महीने की दवा खाकर इससे बाहर निकले। बिमलेश कहते हैं कि उन्हें टीबी चैम्पियन घोषित किया गया है और अपनी जिम्मेदारी निभाते हुए समाज में टीबी के प्रति फैली भ्रांतियों को दूर कर रहे हैं। वे चाहते हैं कि टीबी की गिरफ्त में आए दूसरे लोग भी इससे निजात पाएं।
टीबी ग्रसित मरीज को सम्मान के दृष्टिकोण देखे जाने की जरूरत:
बिमलेश ने बताया कि टीबी कोई लाइलाज बीमारी नहीं है, जरूरत है इसके खिलाफ खड़े होने की तथा इससे ग्रसित मरीज को भी सम्मान के दृष्टिकोण से देखे जाने की। बताया कि जब मैं इस बीमारी से ग्रसित था, तब मेरे साथ भी छुआछूत जैसा व्यवहार किया जाता था। लोग मुझसे बात तक नहीं करते थे। पर मैंने दवाइयों का पूरा सेवन किया और आज मैं भी आम लोगों की तरह ही पूर्णरूपेण स्वस्थ हूं।
पॉजिटिव सोच से मिली टीबी से निजात:
बिमलेश बताते हैं कि शुरूआत में सब ठीक था, लेकिन एक दिन अचानक खांसते समय उनके मुंह से खून आ गया। वे तुरंत सरकारी अस्पताल गए। टेस्ट के बाद पता चला कि उनको टीबी हो गया है। इस जानकारी से परिवार का हर सदस्य सन्न रह गया। हालांकि, बिमलेश ने ये जानने के बाद भी उम्मीद नहीं छोड़ी। लगातार पॉजिटिव सोच की वजह से उन्हें इस बीमारी से लड़ने में ताकत मिली। तय समय पर दवा लेने और स्वास्थ्य संबंधी डॉक्टरों के दिशा-निर्देशों का पालन पूरी तरह से किया। जिसकी बदौलत उन्होंने 26 महीने के अंदर ही टीबी पर जीत दर्ज कर ली। टीबी का पता चला तो उन्होंने निजी अस्पताल की जगह सरकारी अस्पताल में इलाज कराया।
टीबी मरीज से भेदभाव नहीं, हमदर्दी रखें:
डुमरा पीएचसी में कार्यरत वरीय यक्ष्मा पर्यवेक्षिका श्वेतनिशा सिंह ने कहा कि समाज को टीबी मरीज से भेदभाव नहीं, हमदर्दी रखनी होगी। टीबी को लेकर हमारे समाज में गलत अवधारणाएं प्रचलित हैं, जिन्हें दूर किया जाना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि समाज में टीबी को लेकर अब भी एक तरह का डर है। यह डर कहीं न कहीं मरीजों के साथ भेदभाव का कारण बनता है। उन्होंने कहा कि टीबी रोगियों के प्रति भेदभाव को रोकने के लिए जन सहभागिता बहुत जरूरी है। उन्होंने बताया कि टीबी उन्मूलन के प्रयासों को मजबूती देने के लिये गंभीर प्रयास किये जा रहे हैं। इसे लेकर लगातार जागरूकता संबंधी गतिविधियों का संचालन किया जा रहा है। जिले के सरकारी अस्पतालों में टीबी की विश्वसनीय जांच व सम्पूर्ण इलाज की सुविधा उपलब्ध है।
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