सदर अस्पताल में 0-से 5 साल तक के मूक -बधिर बच्चों की हुई मुफ्त जाँच

- कॉक्लियर  इम्प्लांट के लिए बच्चों को भेजा जाएगा डॉ एस एन मेहरोत्रा फाउंडेशन कानपुर 

- एक बच्चे के इलाज में आता है लगभग 7 लाख का खर्च 

मोतिहारी। सदर अस्पताल मोतिहारी में 0-से 5 साल तक के  मूक- बधिर  बच्चों की जाँच हेतु मेडिकल कैंप लगाया गया। इस कैम्प में  33 बच्चों की जाँच डॉ एस एन मेहरोत्रा फाउंडेशन कानपुर के द्वारा की गयी है। पिपराकोठी, कोटवा, फेनहरा,मधुबन, चकिया, तेतरिया, मेहसी, घोड़ासहन, मोतिहारी सदर सहित कई  प्रखंडों  के बच्चे आरबीएसके टीम के सहयोग से जाँच के लिए आए। मौके पर सिविल सर्जन डॉ अंजनी कुमार व  एसीएमओ डॉ रंजीत राय ने  बताया कि आज जिले के ई एन टी चिकित्सकों की टीम के द्वारा बच्चों की स्क्रीनिंग करके  चिह्नित  किया जायेगा। इसके बाद बच्चों को मुफ्त इलाज भी मुहैया कराया जायेगा।

पहले भी मूक - बधिर बच्चों का कराया गया है ऑपरेशन:

आरबीएसके जिला समन्वयक,डॉ मनीष कुमार ने बताया कि  बिहार में सबसे पहले पूर्वी चम्पारण जिले के रामगढ़वा प्रखंड के अहिरौलिया गाँव के मुर्गिया टोला (वार्ड संख्या (01) निवासी असहाब आलम के छह वर्षीय पुत्र अब्दुल रहमान का पटना एम्स में ऑपरेशन हुआ था। उन्होंने बताया कि अब बिहार सरकार के द्वारा कॉक्लियर इम्प्लांट के लिए बच्चों को डॉ एस एन मेहरोत्रा फाउंडेशन कानपुर भेजा जाएगा। डॉ मनीष कुमार ने बताया कि एक बच्चे के इलाज में लगभग 7 लाख रुपए का खर्च आता है, जो बिहार सरकार द्वारा वहन किया जाता है। उन्होंने बताया कि  जन्म के बाद कुछ बच्चे पूर्णतः बहरे होते हैं। जिसके कारण उन्हें कुछ सुनाई नहीं देता और बाद में वे गूंगे भी हो जाते हैं। ऐसे बच्चों के इलाज के लिए आरबीएसके टीम द्वारा उन्हें स्क्रीनिंग करने के बाद इलाज के लिए कानपुर भेजा जाता है।

क्या है कॉक्लियर इंप्लांट:

कॉक्लियर इंप्लांट ऐसा इलेक्ट्रॉनिक उपकरण है, जिसे सर्जरी द्वारा कान के अंदरुनी हिस्से में लगाया जाता । यह कान के बाहर लगे उपकरण से चालित होता है। इसका उपयोग आवाज को सुनने की असमर्थता को  ठीक करने के लिए किया जाता है। इस प्रक्रिया को कॉक्लियर इंप्लांट सर्जरी कहा जाता है।

मौके पर सिविल सर्जन डॉ अंजनी कुमार, एसीएमओ डॉ रंजीत राय, आरबीएसके के जिला समन्वयक डॉ मनीष कुमार,डॉ खालीद अख्तर, एवं डॉ एस एन मेहरोत्रा फाउंडेशन की टीम उपस्थित थीं।

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