फाइलेरिया, कालाजार और एईएस के गुड प्रैक्टिस को महाराष्ट्र से आई मेडिकल कॉलेज की टीम अपने राज्य में करेंगे लागू
- दो दिवसीय दौरे पर आई थी के ई एम मेडिकल कॉलेज, मुंबई की टीम
- चमकी और रेफरल फाइलेरिया क्लिनिक का किया दौरा
सीतामढ़ी। जिले में केईएम मेडिकल कॉलेज से आयी मेडिकल छात्रों की टीम का दो दिवसीय दौरा गुरुवार को खत्म हो गया। यह टीम अपने कम्युनिटी मेडिसीन के हेड डॉ अचला आचार्य के साथ दौरे पर थी। टीम ने जिले में फाइलेरिया, कालाजार और एईएस के गुड प्रैक्टिस को देखने और समझने आयी थी। जिला भीबीडीसी पदाधिकारी डॉ रविन्द्र कुमार यादव ने बताया कि टीम ने जिले के द्वारा फाइलेरिया के लिए पहल की गयी माइक्रोप्लान, ट्रांसमिशन कंट्रोल, टारगेट पापुलेशन तक विभाग की पहुंच और गैप असेसमेंट के साथ ओवरकम जैसे तरीकों से अवगत हुए। वहीं कम्युनिटी लेवल पर जागरुकता के लिए कैसे जनप्रतिनिधि और अंतर विभागीय सहयोग लिया गया उसकी बारीकियों को सीखा। इसके साथ ही एचडब्ल्यूसी स्तर पर चल रहे फाइलेरिया क्लीनिक के बारे में भी जाना। मेडिकल छात्रों ने कालाजार मुक्त जिले की स्थिति को यथावत रखने के लिए अपनाई जाने वाली विधियों से भी अवगत हुए।
सीतामढ़ी की ट्रिक,महाराष्ट्र में अपनाएगी टीम:
केईएम मेडिकल कॉलेज की कम्युनिटी मेडिसिन की एचओडी डॉ अचला आचार्य ने कहा कि जिले ने ट्रॉपिकल डिजीज पर बहुत ही उम्दा काम किया है। इस जिले ने कई मामलों में देश को भी दिशा दी है। बहुत सी बातें हैं जो अनुकरणीय है, जिन्हें मैं महाराष्ट्र में अनुसरण करुंगी। वहीं मेडिकल छात्र सलील सकलेचा ने बताया कि फाइलेरिया और कालाजार के गुड प्रैक्टिस को देखा बहुत अच्छा लगा। हमने लाइव डेमो भी देखा बहुत कुछ सीखने को मिला। कम्युनिटी को कैसे इंगेज किया जाए किसी बीमारी के उन्मूलन के लिए यह सीतामढ़ी से बेहतर कोई नहीं समझा सकता।
एईएस वार्ड का किया मुआयना:
मेडिकल छात्रों की टीम ने सदर स्थित एईएस वार्ड और रेफरल एमएमडीपी क्लीनिक का मुआयना भी किया। वहां की फैसिलिटी और प्रबंधन के बारे में विस्तृत जानकारी ली। एईएस एसओपी से संबंधित भी प्रश्न पूछे। टीम में पीरामल के डॉ रविन्द्र नाथ शर्मा, डॉ इंदिरा नाथ बनर्जी, डॉ तन्मय महापात्रा सहित कुल 24 लोग शामिल थे।
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