सदर अस्पताल में रेफरल के बदले रात में जटिल सर्जरी कर बचाई गई महिला की जान

-महिला का किया गया इमरजेंसी लैप्रोटॉमी आपरेशन 

-डॉ प्रेरणा सिंह व उनकी टीम ने लिया साहसिक निर्णय 

-3 महीने की रिकवरी ब्रेक के बाद गर्भधारण प्रक्रिया का किया जाएगा मार्गदर्शन

मुजफ्फरपुर। अस्पताल में मंगलवार को गंभीर स्थिति में पहुंची एक महिला मरीज को उच्च संस्थान (हायर सेंटर) रेफर करने के बजाय चिकित्सकों ने रात में ही आपातकालीन सर्जरी कर उसकी जान बचा ली और एक बड़ी मिसाल कायम की। जिला कार्यक्रम प्रबंधक मो. सलीम जावेद ने बताया कि कुढ़नी प्रखंड व थाना क्षेत्र के ग्राम छोटा सुमेरा निवासी मो. मजरे आलम की पत्नी सजरा खातून पेट में असहनीय दर्द और बेहद नाजुक हालत में सदर अस्पताल की ओपीडी  पहुंची थीं। शादी के 7 साल बाद यह उनकी पहली प्रेग्नेंसी थी। बाहर से कराई गई अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट में पता चला कि यह एक्टोपिक प्रेग्नेंसी (गर्भाशय के बाहर बाएं तरफ की फेलोपियन ट्यूब में गर्भ ठहरना) का गंभीर मामला था, जहां ट्यूब फटने के कारण पेट के भीतर भारी आंतरिक रक्तस्राव (इंटरनल ब्लीडिंग) हो रहा था। मरीज की जान पर बने भारी जोखिम और रेफरल में लगने वाले कीमती समय को देखते हुए स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ डॉ. प्रेरणा सिंह और उनकी समर्पित मेडिकल टीम ने तत्काल भर्ती कर आपातकालीन जांचें कराईं, आवश्यक दवाएं दीं और रात में ही इमरजेंसी लैप्रोटॉमी (Laparotomy) ऑपरेशन का साहसिक निर्णय लिया।  

​रक्तस्राव पर पाया काबू, ओवरी की छिपी गांठ भी हटाई:

सर्जरी के दौरान डॉक्टरों ने तत्परता दिखाते हुए सबसे पहले ट्यूब फटने के कारण हो रहे रक्तस्राव को नियंत्रित किया और प्रभावित हिस्से को सुरक्षित रूप से बाहर निकाला। इसी दौरान मेडिकल टीम ने पाया कि मरीज के दाहिनी ओर के अंडाशय (ओवरी) में भी एक गांठ मौजूद थी, जो बाहरी अल्ट्रासाउंड जांच में स्पष्ट नहीं हो पाई थी। भविष्य में मरीज को दोबारा किसी सर्जरी की परेशानी और जोखिम से बचाने के लिए डॉक्टरों ने तुरंत बाहर मौजूद उनके पति मो. मजरे आलम से बात कर सहमति ली और उसी समय उस गांठ को भी सफलतापूर्वक हटा दिया।  

​भविष्य में मातृत्व की उम्मीदें सुरक्षित, 3 महीने का रिकवरी ब्रेक:

महिला को अब तक कोई संतान नहीं होने के कारण, उनके भविष्य में मां बनने की संभावनाओं को ध्यान में रखते हुए डॉक्टरों ने यह पूरी सर्जरी बेहद संवेदनशीलता और कुशलता से पूरी की। अस्पताल प्रबंधन के अनुसार मरीज को फिलहाल 3 महीने का रिकवरी ब्रेक दिया गया है और पूर्ण रूप से स्वस्थ होने के बाद उन्हें आगे गर्भधारण प्रक्रिया के लिए आवश्यक चिकित्सकीय मार्गदर्शन प्रदान किया जाएगा।  

​जिला स्तर पर रेफरल मुक्त उपचार का नया मानक:

सदर अस्पताल की यह त्वरित, संवेदनशील और विशेषज्ञ चिकित्सा सेवा न केवल मरीज के जीवन की रक्षा के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण रही, बल्कि इसने यह भी सिद्ध कर दिया है कि सदर अस्पताल और आसपास के जिलों के सरकारी स्वास्थ्य क्षेत्र में अब उच्च स्तरीय और जटिल इलाज के लिए रेफरल के बजाय जिला स्तर पर ही सफल प्रबंधन पूरी तरह संभव है।

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